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खड़गे के मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर बवाल: हल्द्वानी की घटना ने उठाए जाति और संविधान पर गंभीर सवाल

संपादक : अर्जुन देव सिंह
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मंच के शुद्धिकरण को लेकर बड़ा विवाद

बरेली। अर्जुन शस्त्र न्यूज़। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, 8 अगस्त को रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा हुई थी। इसके बाद वहां हवन और गंगाजल से शुद्धिकरण किए जाने की बात सामने आई। खड़गे ने इस घटना को जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं।

खड़गे ने संसद में उठाया मामला

मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यक्रम के बाद मंच का शुद्धिकरण किया गया। उन्होंने इसे अपने लिए अपमानजनक बताते हुए अस्पृश्यता के दर्द से जोड़ा। मामला सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

भाजपा ने कहा—हमारा संबंध नहीं

मामले में भाजपा का पक्ष भी सामने आया है। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि भाजपा का इस शुद्धिकरण कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने घटना को दुखद बताया और जांच की बात कही। इसलिए अभी यह कहना उचित नहीं होगा कि यह कार्यक्रम भाजपा ने कराया था। जांच के बाद ही पूरी स्थिति साफ होगी।

बरेली कांग्रेस नेताओं ने जताया विरोध

कांग्रेस ओबीसी विभाग बरेली के जिलाध्यक्ष बंशीधर गंगवार और कांग्रेस अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग बरेली के जिलाध्यक्ष पी.आर. आनंद ने घटना की कड़ी निंदा की है। दोनों नेताओं ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं। उनके कार्यक्रम के बाद मंच का शुद्धिकरण किए जाने की खबर बेहद गंभीर और आपत्तिजनक है।

संविधान बराबरी की बात करता है

भारत का संविधान सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है। अनुच्छेद 14 कानून के सामने समानता की बात करता है। अनुच्छेद 15 धर्म, जाति और कुछ अन्य आधारों पर भेदभाव से सुरक्षा देता है। अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को समाप्त करता है और उसके किसी भी रूप में पालन को प्रतिबंधित करता है।

जाति के आधार पर ‘शुद्धिकरण’ पर सवाल

अगर किसी व्यक्ति की जाति के कारण उसे अपवित्र मानकर किसी सार्वजनिक जगह का शुद्धिकरण किया गया हो, तो यह सामाजिक बराबरी और मानवीय सम्मान पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। हालांकि, इस मामले में कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह जांच के बाद ही तय किया जा सकता है।

निष्पक्ष जांच की मांग

बंशीधर गंगवार और पी.आर. आनंद ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। वहीं भाजपा ने इस आयोजन से अपना संबंध होने से इनकार किया है।

लोकतंत्र में भेदभाव की जगह नहीं

राजनीति में विचारों का विरोध हो सकता है। लेकिन किसी व्यक्ति को उसकी जाति के कारण अपमानित करना लोकतांत्रिक समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। हल्द्वानी की घटना की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि आरोप और सच के बीच पूरी स्थिति सामने आ सके।

अर्जुन शस्त्र न्यूज़ की नजर

अर्जुन शस्त्र न्यूज़ का मानना है कि इस मामले में राजनीति से ऊपर उठकर सच्चाई सामने आनी चाहिए। यदि जांच में जातिगत भेदभाव या कानून का उल्लंघन साबित होता है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो उसकी जानकारी भी जनता के सामने रखी जानी चाहिए।

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