अर्जुन शस्त्र | बरेली —
बरेली के तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के निलंबन को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर जारी है। प्रशासनिक स्तर पर सामने आए तथ्यों के अनुसार यह कार्रवाई किसी विचारधारा या निजी मत के आधार पर नहीं, बल्कि सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन को लेकर की गई है। शासन का कहना है कि एक PCS अधिकारी रहते हुए किसी सरकारी नीति पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करना और उसे विरोध के रूप में प्रस्तुत करना, सेवा नियमों के अनुरूप नहीं माना जाता।
प्रशासन का यह भी तर्क है कि अधिकारी द्वारा दिया गया इस्तीफा एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया की तरह न होकर सार्वजनिक असहमति और विरोध के रूप में सामने आया। मीडिया में दिए गए बयानों, समर्थकों की सक्रियता और बाद में धरना-प्रदर्शन जैसी स्थिति ने इस पूरे घटनाक्रम को अनुशासन से जुड़ा विषय बना दिया। सेवा आचरण नियमों के तहत कोई भी अधिकारी पद पर रहते हुए आंदोलन या प्रदर्शन के जरिए दबाव नहीं बना सकता।
सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक अधिकारी को निजी विचार रखने का अधिकार है, लेकिन पद पर रहते हुए उन विचारों को सार्वजनिक विरोध का रूप देना प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ है। इसी आधार पर इस्तीफा स्वीकार न करते हुए निलंबन और विभागीय जांच का निर्णय लिया गया है। फिलहाल पूरा मामला जांच प्रक्रिया के अधीन है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
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