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मुरादाबाद मैनाठेर कांड: 15 साल बाद आया इंसाफ, क्या देर से मिला न्याय भी न्याय कहलाता है?

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मुरादाबाद संवाददाता – राज शर्मा


15 साल बाद आया फैसला, लेकिन इंतज़ार बहुत लंबा था

मुरादाबाद के चर्चित मैनाठेर कांड में करीब 15 साल बाद अदालत का फैसला आया है। दोषियों को सजा मिली है। यह फैसला बताता है कि कानून देर से सही, लेकिन अपना काम करता है। यह उन लोगों के लिए भी संदेश है जो सोचते हैं कि समय बीतने के बाद अपराध भुला दिए जाएंगे।

लेकिन एक सवाल अभी भी बाकी है

फैसले से पीड़ित परिवारों को राहत जरूर मिली होगी, लेकिन क्या 15 साल का इंतज़ार आसान था? इतने लंबे समय तक अदालतों के चक्कर लगाना, उम्मीद बनाए रखना और हर तारीख का इंतज़ार करना किसी भी परिवार के लिए आसान नहीं होता। इसलिए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर न्याय जल्दी मिलता, तो क्या लोगों का भरोसा और मजबूत नहीं होता?

न्याय के साथ समय भी बहुत ज़रूरी है

अदालत का फैसला स्वागत योग्य है, लेकिन हमारी व्यवस्था को यह भी सोचना होगा कि गंभीर मामलों का फैसला जल्दी कैसे हो। जब अपराधी को समय पर सजा मिलती है, तो समाज में कानून का भरोसा बढ़ता है और अपराध करने वालों में डर भी पैदा होता है।

हिंसा कभी समाधान नहीं होती

किसी भी विवाद का हल हिंसा या कानून को अपने हाथ में लेने से नहीं निकलता। हमारे देश में अदालतें इसी लिए हैं कि हर मामले का फैसला कानून के अनुसार हो। हमें कानून और संविधान पर भरोसा रखना चाहिए।

यही सबसे बड़ी सीख है

मैनाठेर कांड का यह फैसला सिर्फ एक पुराने केस का अंत नहीं है, बल्कि यह याद दिलाता है कि कानून से बड़ा कोई नहीं है। अब जरूरत इस बात की है कि आने वाले समय में लोगों को न्याय के लिए 15 साल तक इंतज़ार न करना पड़े। न्याय तभी सबसे मजबूत माना जाएगा, जब वह समय पर भी मिले।


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