अर्जुन शस्त्र हेल्प डेस्क —
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने झूठी एफआईआर दर्ज कराने के मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस जांच में यह सामने आता है कि एफआईआर झूठी या भ्रामक सूचना के आधार पर दर्ज की गई है, तो केवल मामले को बंद करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सूचना देने वाले व्यक्ति के साथ-साथ उसके गवाहों के खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।
हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि विवेचना अधिकारी जब ऐसे मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करें, तो संबंधित शिकायतकर्ता और गवाहों के विरुद्ध लिखित शिकायत दर्ज कराना अनिवार्य होगा। अदालत का मानना है कि झूठे मुकदमों के कारण न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होता है और निर्दोष लोगों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि विवेचना अधिकारी या पुलिस अधिकारी इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ अवमानना की कार्यवाही भी की जा सकती है। न्यायालय का यह फैसला झूठे मामलों पर अंकुश लगाने और कानून के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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