Homeदेश - विदेश2014 में 95 लाख करोड़… 2026 में करीब 300 लाख करोड़!

2014 में 95 लाख करोड़… 2026 में करीब 300 लाख करोड़!

आखिर देश का कर्ज़ इतनी तेजी से कैसे बढ़ा?

क्या यह विकास की कीमत है या भविष्य की चुनौती?

पढ़िए आंकड़ों पर आधारित विशेष संपादकीय

अर्जुन शस्त्र | राष्ट्रीय विशेष संपादकीय

देश की अर्थव्यवस्था को लेकर आज सबसे बड़ी चर्चाओं में से एक विषय है बढ़ता सरकारी कर्ज़। राजनीतिक मंचों से लेकर सोशल मीडिया तक यह सवाल बार-बार उठाया जा रहा है कि आखिर 2014 से 2026 के बीच देश पर कितना कर्ज़ बढ़ा और इसका आम नागरिक पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि इस मुद्दे को भावनाओं और आरोप-प्रत्यारोप से अलग रखकर आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर समझा जाए।

2014 में देश पर कितना था कर्ज़?

उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में केंद्र सरकार का कुल कर्ज़ लगभग 56 लाख करोड़ रुपये था (स्रोत: भारत सरकार, Union Budget 2014-15)। वहीं यदि केंद्र और सभी राज्य सरकारों के कुल सार्वजनिक कर्ज़ को जोड़ा जाए, तो यह आंकड़ा लगभग 90 से 95 लाख करोड़ रुपये के आसपास था (स्रोत: OGD India एवं सार्वजनिक वित्तीय आंकड़े)। उस समय भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी और सरकारी उधारी का स्तर आज की तुलना में काफी कम था।

2026 में कहां पहुंच गया कर्ज़ का आंकड़ा?

वर्ष 2026 तक केंद्र सरकार का कुल कर्ज़ बढ़कर लगभग 197 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है (स्रोत: Union Budget 2026-27, भारत सरकार)। वहीं केंद्र और राज्य सरकारों के कुल सार्वजनिक कर्ज़ को मिलाकर यह आंकड़ा करीब 295 से 300 लाख करोड़ रुपये के आसपास माना जा रहा है (स्रोत: RBI आधारित Debt Estimates एवं PRS Legislative Research)। यानी करीब 12 वर्षों में देश का कुल सरकारी कर्ज़ तीन गुना से अधिक बढ़ चुका है।

क्या सिर्फ कर्ज़ बढ़ना ही चिंता की बात है?

अर्थशास्त्रियों के अनुसार केवल कर्ज़ का बढ़ना पूरी तस्वीर नहीं बताता। महत्वपूर्ण यह है कि देश की GDP (ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट) कितनी तेजी से बढ़ रही है और लिया गया कर्ज़ किन क्षेत्रों में खर्च किया जा रहा है। यदि कर्ज़ का उपयोग सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा, रक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास में हो, तो उसे निवेश माना जाता है। लेकिन यदि कर्ज़ अर्थव्यवस्था की वृद्धि से अधिक गति से बढ़े, तो भविष्य में वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।

आम जनता के मन में उठता सबसे बड़ा सवाल

आखिर यह कर्ज़ चुकाएगा कौन? विशेषज्ञों के अनुसार सरकार टैक्स, सरकारी आय और आर्थिक गतिविधियों से प्राप्त राजस्व के माध्यम से कर्ज़ और उसके ब्याज का भुगतान करती है। इसलिए मजबूत अर्थव्यवस्था, रोजगार के अवसर और नियंत्रित महंगाई किसी भी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

आंकड़ों की बहस हो, आरोपों की नहीं

लोकतंत्र में सरकारों की नीतियों का मूल्यांकन होना चाहिए, लेकिन वह तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर होना चाहिए। यह एक तथ्य है कि 2014 की तुलना में 2026 में सरकारी कर्ज़ कई गुना बढ़ा है। वहीं यह भी उतना ही बड़ा तथ्य है कि इसी अवधि में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार भी पहले की तुलना में काफी बड़ा हुआ है। ऐसे में अंतिम निर्णय पाठकों और विशेषज्ञों पर छोड़ देना चाहिए कि वे इन आंकड़ों को किस दृष्टि से देखते हैं।

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📚 स्रोत (Sources): • भारत सरकार – Union Budget 2014-15 • भारत सरकार – Union Budget 2026-27 • OGD India (Open Government Data) • PRS Legislative Research • RBI आधारित सार्वजनिक ऋण (Debt) अनुमान

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✍️ संपादक – अर्जुन देव सिंह

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