अर्जुन शस्त्र हेल्प डेस्क —
कोर्ट ने रिश्तों और कानून को लेकर एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की है। अदालत का कहना है कि अगर दो बालिग लोग आपसी सहमति से लंबे समय तक रिश्ते में रहे हों और बाद में किसी वजह से शादी न हो पाए, तो केवल इसी आधार पर इसे आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हर ऐसा मामला धोखाधड़ी या जबरदस्ती की श्रेणी में नहीं आता। यदि महिला और पुरुष दोनों की सहमति से संबंध बने हों और शुरुआत से कोई गलत नीयत साबित न हो, तो शादी न होने को अपराध मानना कानून की सही व्याख्या नहीं होगी। हर केस की परिस्थितियों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
अदालत के अनुसार, सहमति और धोखे के बीच फर्क समझना बेहद अहम है। अगर शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाए गए हों, तो मामला अलग हो सकता है, लेकिन सहमति से बने रिश्ते के बाद हालात बदलने पर आपराधिक कार्रवाई अपने-आप नहीं बनती।
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Note: Based on a judicial remark


