भागलपुर की पुरानी फाइल फिर चर्चा में, निवेश या विशेष रियायत?
अर्जुन शस्त्र | रिविजिट न्यूज़ — बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती की वह पुरानी फाइल एक बार फिर चर्चा में है। अदानी समूह की 2400 मेगावाट बिजली परियोजना के लिए करीब 1,050 एकड़ जमीन 33 साल की लीज पर मात्र ₹1 सालाना टोकन किराये पर उपलब्ध कराई गई थी। यानी पूरे 33 वर्षों में कुल लीज राशि सिर्फ ₹33 तय हुई।
आम आदमी एक छोटा-सा प्लॉट खरीदने के लिए जीवन भर की कमाई खर्च कर देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतनी बड़ी जमीन इतनी मामूली लीज राशि पर क्यों दी गई? क्या यह राज्य में निवेश और रोजगार लाने की नीति थी, या बड़े कॉरपोरेट घरानों को दी गई असाधारण रियायत?
सरकार ने इसे बिजली उत्पादन, निवेश और रोजगार से जुड़ा फैसला बताया था, जबकि विपक्ष ने इसे कॉरपोरेट को विशेष लाभ पहुंचाने वाला निर्णय कहा। समय बीत गया, लेकिन सवाल आज भी कायम है—क्या सबसे बड़ा फायदा जनता को मिला या कॉरपोरेट जगत को?
रिविजिट फैक्ट फाइल
▪️ स्थान : पीरपैंती, भागलपुर (बिहार)
▪️ परियोजना : अदानी पावर 2400 मेगावाट थर्मल प्लांट
▪️ जमीन : लगभग 1,050 एकड़
▪️ लीज अवधि : 33 वर्ष
▪️ लीज किराया : ₹1 प्रति वर्ष
▪️ कुल किराया : ₹33
▪️ मंजूरी : 5 अगस्त 2025, बिहार कैबिनेट (नीतीश कुमार सरकार)
जनता का सवाल
क्या 1,050 एकड़ जमीन का 33 साल का किराया सिर्फ ₹33 होना सामान्य बात है, या इस फैसले पर आज भी जवाब दिया जाना चाहिए?
नोट : यह रिविजिट रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और उस समय उठे राजनीतिक विवाद पर आधारित है। किसी अदालत या जांच एजेंसी ने इस मामले को अवैध या घोटाला घोषित नहीं किया है।


