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रिश्ता प्यार का

कवयित्री – अनीता अनंत

रिश्ता एहसास से बनता है।।
रिश्ता प्यार से बनता है।।

रिश्ता अपनेपन से बनता है।।
रिश्ता दिलों की चाहत से बनता है।।

रिश्ता सच से बनता है।।
रिश्ता मोहब्बत से बनता है।।

रिश्ता एक दूजे से किये
वादे से बनता है।।

।। है वो झूठे रिश्ते ।।

जो दिल को दुखाए वो है, झूठे रिश्ते।।

दिलाके अपनेपन का एहसास कर दे दूरियां दिलों के दरमियां
है, वो झूठे रिश्ते।।

दिखाया एहसास कि हम रहेंगे दिलों के पास, तोड़ी हर कसम उसने छोड़ मेरा साथ है, वो झूठे रिश्ते।।

जो कर के वादे तोड़े है उसने
कहा कि मेरा वादा है हमेशा साथ निभाऊंगा, हमेशा का एहसास दिला कर बीच राह में छोड़ा उसने।।

मेरा रहा उस पर पूरा विश्वास लेकिन,
मेरे विश्वास को धीरे-धीरे करके तोड़ा उसने।।
है, वो झूठा विश्वास उसका।।

बस आखिरी उसको ये बताना है कि किसी का दिल अब नहीं तुम्हें दुखाना है, कि न जाने कब इस जिंदगी की शाम ढल जाए। जो भी रिश्ता बनाओ उसको तुम्हें दिल से निभाना है।।

देता है दिल यही दुआ उसको कि खुश रखे रब हमेशा-हमेशा उसको।।

इतना तो मालूम है मुझे भी, कि मेरे जाने का गम तो रहेगा हमेशा-हमेशा उसको भी।।

रहेगा एहसास हमेशा उसको ये
कि काश, आखिरी बात तो कर लेता वो मुझसे, शायद कुछ गुनाह तो कम हो जाते उसके।।

अनीता अनंत


संपादक की नज़र से

कवयित्री अनीता अनंत की कविता “रिश्ता प्यार का” प्रेम, विश्वास, अपनापन और टूटे हुए रिश्तों की भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है। कविता की विशेषता इसकी सरल भाषा और सीधे दिल तक पहुंचने वाली अभिव्यक्ति है। रचना पाठकों को यह संदेश देती है कि रिश्ते केवल शब्दों से नहीं, बल्कि सच्चे एहसास, विश्वास और समर्पण से बनते हैं।

कविता में टूटे वादों और बिखरे विश्वास का दर्द दिखाई देता है, लेकिन इसके बावजूद कवयित्री कटुता का मार्ग नहीं अपनातीं। अंतिम पंक्तियों में दूसरे व्यक्ति की खुशहाली की कामना और आत्मिक शुभेच्छा इस रचना को एक सकारात्मक संदेश प्रदान करती है। यही भाव इस कविता को विशेष बनाता है।

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✍️ संपादक – अर्जुन देव सिंह
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